menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१८
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
तस्य तत्काञ्चनं छत्रं ध्रिय़माणं व्यरोचत |  २४   क
यथैव सुसमिद्धस्य पावकस्यात्ममण्डलम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति