menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१८
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
ताः समासाद्य भगवान्सर्वभूतगणैर्वृतः |  ४१   क
अर्चितश्च स्तुतश्चैव सान्त्वय़ामास ता अपि ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति