शान्ति पर्व  अध्याय २१९

नमुचिरु उवाच

पर्याय़ैर्हन्यमानानामभिय़ोक्ता न विद्यते |  १३   क
दुःखमेतत्तु यद्द्वेष्टा कर्ताहमिति मन्यते ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति