शान्ति पर्व  अध्याय २१९

नमुचिरु उवाच

ऋषींश्च देवांश्च महासुरांश्च; त्रैविद्यवृद्धांश्च वने मुनींश्च |  १४   क
कान्नापदो नोपनमन्ति लोके; परावरज्ञास्तु न सम्भ्रमन्ति ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति