शान्ति पर्व  अध्याय २१९

नमुचिरु उवाच

तत्सदः स परिषत्सभासदः; प्राप्य यो न कुरुते सभाभय़म् |  १८   क
धर्मतत्त्वमवगाह्य वुद्धिमा; न्योऽभ्युपैति स पुमान्धुरन्धरः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति