वन पर्व  अध्याय २१९

मार्कण्डेय़ उवाच

दैत्यानां या दितिर्माता तामाहुर्मुखमण्डिकाम् |  २९   क
अत्यर्थं शिशुमांसेन सम्प्रहृष्टा दुरासदा ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति