वन पर्व  अध्याय २१९

मार्कण्डेय़ उवाच

तासामेव कुमारीणां पतय़स्ते प्रकीर्तिताः |  ३१   क
अज्ञाय़माना गृह्णन्ति वालकान्रौद्रकर्मिणः ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति