वन पर्व  अध्याय २१९

मार्कण्डेय़ उवाच

सरमा नाम या माता शुनां देवी जनाधिप |  ३३   क
सापि गर्भान्समादत्ते मानुषीणां सदैव हि ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति