menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय २८
chevron_left
chevron_right
काक उवाच
संस्थाप्य तं चापि पुनः समाश्वास्य च खेचरम् |  ५४   क
गतो यथेप्सितं देशं हंसो मन इवाशुगः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति