menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१९
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
गन्धर्वाश्चापि यं दिव्याः संस्पृशन्ति नरं भुवि |  ५०   क
उन्माद्यति स तु क्षिप्रं ग्रहो गान्धर्व एव सः ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति