आदि पर्व  अध्याय २२

सूत उवाच

एवं स्तुतस्तदा कद्र्वा भगवान्हरिवाहनः |  १   क
नीलजीमूतसङ्घातैर्व्योम सर्वं समावृणोत् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति