आदि पर्व  अध्याय २२

सूत उवाच

नागानामुत्तमो हर्शस्तदा वर्षति वासवे |  ५   क
आपूर्यत मही चापि सलिलेन समन्ततः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति