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शल्य पर्व
अध्याय ४६
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वैशम्पाय़न उवाच
ससर्ज भगवान्यत्र सर्वलोकपितामहः |  २१   क
तत्राप्लुत्य ततो व्रह्मा सह देवैः प्रभुः पुरा |  २१   ख
ससर्ज चान्नानि तथा देवतानां यथाविधि ||  २१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति