आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २२

वैशम्पाय़न उवाच

व्यरोचय़ः पुरा ह्यस्मानुत्साह्य प्रिय़दर्शने |  २०   क
विदुराय़ा वचोभिस्त्वमस्मान्न त्यक्तुमर्हसि ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति