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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
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वैशम्पाय़न उवाच
यदा राज्यमिदं कुन्ति भोक्तव्यं पुत्रनिर्जितम् |  २५   क
प्राप्तव्या राजधर्माश्च तदेय़ं ते कुतो मतिः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति