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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
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वैशम्पाय़न उवाच
कृपं निवर्तय़ामास युय़ुत्सुं च महारथम् |  ५   क
धृतराष्ट्रो महीपालः परिदाय़ युधिष्ठिरे ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति