सभा पर्व  अध्याय २२

वैशम्पाय़न उवाच

यं लेभे वासवाद्राजा वसुस्तस्माद्वृहद्रथः |  २७   क
वृहद्रथात्क्रमेणैव प्राप्तो वार्हद्रथं नृपम् ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति