सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिद्विनय़सम्पन्नः कुलपुत्रो वहुश्रुतः |  २९   क
अनसूय़ुरनुप्रष्टा सत्कृतस्ते पुरोहितः ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति