उद्योग पर्व  अध्याय ३३

वैशम्पाय़न उवाच

विदुरोऽहं महाप्राज्ञ सम्प्राप्तस्तव शासनात् |  ८   क
यदि किञ्चन कर्तव्यमय़मस्मि प्रशाधि माम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति