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सभा पर्व
अध्याय २२
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वैशम्पाय़न उवाच
गत्वैकत्वं च कृष्णेन पार्थाभ्यां चैव सत्कृतः |  ४२   क
विवेश राजा मतिमान्पुनर्वार्हद्रथं पुरम् ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति