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वन पर्व
अध्याय ५०
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वृहदश्व उवाच
दमय़न्ति नलो नाम निषधेषु महीपतिः |  २६   क
अश्विनोः सदृशो रूपे न समास्तस्य मानुषाः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति