menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
विराट पर्व
अध्याय २२
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
तत आश्वासय़त्कृष्णां प्रविमुच्य विशां पते |  २६   क
उवाच च महावाहुः पाञ्चालीं तत्र द्रौपदीम् |  २६   ख
अश्रुपूर्णमुखीं दीनां दुर्धर्षः स वृकोदरः ||  २६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति