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विराट पर्व
अध्याय २२
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वैशम्पाय़न उवाच
एवं ते निहता राजञ्शतं पञ्च च कीचकाः |  २९   क
स च सेनापतिः पूर्वमित्येतत्सूतषट्शतम् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति