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उद्योग पर्व
अध्याय २२
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धृतराष्ट्र उवाच
न तस्य किञ्चिद्वचनं न कुर्या; त्कुन्तीपुत्रो वासुदेवस्य सूत |  ३७   क
प्रिय़श्चैषामात्मसमश्च कृष्णो; विद्वांश्चैषां कर्मणि नित्ययुक्तः ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति