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भीष्म पर्व
अध्याय २२
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सञ्जय़ उवाच
अनीकमध्ये तिष्ठन्तं राजपुत्रं दुरासदम् |  १४   क
अव्रवीद्भरतश्रेष्ठं गुडाकेशं जनार्दनः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति