उद्योग पर्व  अध्याय १५२

वैशम्पाय़न उवाच

तत्र दुर्योधनो राजा शूरान्वुद्धिमतो नरान् |  २६   क
प्रसमीक्ष्य महावाहुश्चक्रे सेनापतींस्तदा ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति