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द्रोण पर्व
अध्याय २२
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सञ्जय़ उवाच
अन्तरिक्षसवर्णास्तु तारकाचित्रिता इव |  ४०   क
राजानं रोचमानं ते हय़ाः सङ्ख्ये समावहन् ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति