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द्रोण पर्व
अध्याय २२
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सञ्जय़ उवाच
नानारूपेण वर्णेन नानाकृतिमुखा हय़ाः |  ६०   क
रथचक्रध्वजं वीरं घटोत्कचमुदावहन् ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति