menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय २२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
दूरं न शक्यं तत्रासीद्गन्तुमश्वेन केनचित् |  ५३   क
साश्वारोहैर्हतैरश्वैरावृते वसुधातले ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति