आदि पर्व  अध्याय २२०

वैशम्पाय़न उवाच

तथेति तत्प्रतिश्रुत्य भगवान्हव्यवाहनः |  ३२   क
खाण्डवे तेन कालेन प्रजज्वाल दिधक्षय़ा ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति