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आदि पर्व
अध्याय २२०
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वैशम्पाय़न उवाच
स लोकानफलान्दृष्ट्वा तपसा निर्जितानपि |  ८   क
पप्रच्छ धर्मराजस्य समीपस्थान्दिवौकसः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति