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शान्ति पर्व
अध्याय २२०
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भीष्म उवाच
कालेनाक्रम्य लोकेऽस्मिन्पच्यमाने वलीय़सा |  १०२   क
अज्येष्ठमकनिष्ठं च क्षिप्यमाणो न वुध्यसे ||  १०२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति