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शान्ति पर्व
अध्याय २२०
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भीष्म उवाच
कालचारित्रतत्त्वज्ञः सर्वशास्त्रविशारदः |  १०५   क
वैरोचने कृतात्मासि स्पृहणीय़ो विजानताम् ||  १०५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति