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शान्ति पर्व
अध्याय २२०
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भीष्म उवाच
विय़ोनिषु च वीजानि मोक्ष्यन्ते पुरुषा यदा |  ११३   क
सङ्करं कांस्यभाण्डैश्च वलिं चापि कुपात्रकैः ||  ११३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति