वन पर्व  अध्याय २९७

यक्ष उवाच

व्याख्याता मे त्वय़ा प्रश्ना याथातथ्यं परन्तप |  ६२   क
पुरुषं त्विदानीमाख्याहि यश्च सर्वधनी नरः ||  ६२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति