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शान्ति पर्व
अध्याय २२०
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भीष्म उवाच
यस्य राज्ञो नरास्तात सात्त्विकीं वृत्तिमास्थिताः |  ५   क
तस्य स्थैर्यं च धैर्यं च व्यवसाय़श्च कर्मसु ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति