वन पर्व  अध्याय २२०

मार्कण्डेय़ उवाच

एवमुक्ता ततः स्वाहा तुष्टा स्कन्देन पूजिता |  ७   क
पावकेन समाय़ुक्ता भर्त्रा स्कन्दमपूजय़त् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति