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शान्ति पर्व
अध्याय २२१
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श्रीरु उवाच
पुण्येषु त्रिषु लोकेषु सर्वे स्थावरजङ्गमाः |  १९   क
ममात्मभावमिच्छन्तो यतन्ते परमात्मना ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति