शान्ति पर्व  अध्याय २२१

श्रीरु उवाच

साहं वै पङ्कजे जाता सूर्यरश्मिविवोधिते |  २०   क
भूत्यर्थं सर्वभूतानां पद्मा श्रीः पद्ममालिनी ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति