शान्ति पर्व  अध्याय ५४

वासुदेव उवाच

एतस्मात्कारणाद्भीष्म मतिर्दिव्या मय़ा हि ते |  ३१   क
दत्ता यशो विप्रथेत कथं भूय़स्तवेति ह ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति