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शान्ति पर्व
अध्याय २२१
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भीष्म उवाच
त्वय़ा कुरूणां वर यत्प्रचोदितं; भवाभवस्येह परं निदर्शनम् |  ९४   क
तदद्य सर्वं परिकीर्तितं मय़ा; परीक्ष्य तत्त्वं परिगन्तुमर्हसि ||  ९४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति