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अनुशासन पर्व
अध्याय २६
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अङ्गिरा उवाच
नैमिषे स्वर्गतीर्थे च उपस्पृश्य जितेन्द्रिय़ः |  ३२   क
फलं पुरुषमेधस्य लभेन्मासं कृतोदकः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति