menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२१
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
तानि दैत्यशरीराणि निर्भिन्नानि स्म साय़कैः |  ४६   क
अपतन्भूतले राजंश्छिन्नाभ्राणीव सर्वशः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति