menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२१
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
ते तं घनैरिवादित्यं दृष्ट्वा सम्परिवारितम् |  ५३   क
समुद्यतगिरिं राजन्व्यद्रवन्त दिवौकसः ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति