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वन पर्व
अध्याय २०३
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व्याध उवाच
सचेतनं जीवगुणं वदन्ति; स चेष्टते चेष्टय़ते च सर्वम् |  ३३   क
ततः परं क्षेत्रविदो वदन्ति; प्राकल्पय़द्यो भुवनानि सप्त ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति