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आदि पर्व
अध्याय २२२
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वैशम्पाय़न उवाच
ते शार्ङ्गा ज्वलनं दृष्ट्वा ज्वलितं स्वेन तेजसा |  १८   क
जरितारिस्ततो वाचं श्रावय़ामास पावकम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति