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वन पर्व
अध्याय २२२
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वैशम्पाय़न उवाच
क्षेत्राद्वनाद्वा ग्रामाद्वा भर्तारं गृहमागतम् |  २४   क
प्रत्युत्थाय़ाभिनन्दामि आसनेनोदकेन च ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति