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वन पर्व
अध्याय २२२
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वैशम्पाय़न उवाच
पत्याश्रय़ो हि मे धर्मो मतः स्त्रीणां सनातनः |  ३५   क
स देवः सा गतिर्नान्या तस्य का विप्रिय़ं चरेत् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति