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आदि पर्व
अध्याय २२३
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स्तम्वमित्र उवाच
सृष्ट्वा लोकांस्त्रीनिमान्हव्यवाह; प्राप्ते काले पचसि पुनः समिद्धः |  १४   क
सर्वस्यास्य भुवनस्य प्रसूति; स्त्वमेवाग्ने भवसि पुनः प्रतिष्ठा ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति