आदि पर्व  अध्याय २२३

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्तो जातवेदा द्रोणेनाक्लिष्टकर्मणा |  २०   क
द्रोणमाह प्रतीतात्मा मन्दपालप्रतिज्ञय़ा ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति